बलिया : जिले के परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन में बच्चों को ताजी सब्जियां और फल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई किचन गार्डन योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। जिले के 2,249 विद्यालयों को इसके लिए करीब 63 लाख रुपये दिए गए, लेकिन अधिकतर स्कूलों में न तो किचन गार्डन तैयार हुआ और न ही सब्जी की खेती शुरू हो सकी। कई स्थानों पर सब्जियों की जगह घास उग आई है।
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सभी विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत पर्याप्त भूमि वाले 602 विद्यालयों को प्रति विद्यालय पांच हजार रुपये की दर से कुल 30.10 लाख रुपये दिए गए। कम भूमि वाले 1,647 विद्यालयों को
परिषदीय विद्यालयों में किचन गार्डन के लिए धनराशि भेजे जाने के बाद अब जांच कराई जा रही है। जिन स्कूलों में सब्जी की बोआई नहीं हुई है, वहां संबंधित प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। -मनीष कुमार सिंह, बीएसए. बलिया
दो हजार रुपये प्रति विद्यालय के हिसाब से लगभग 32.94 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। निर्देश था कि धनराशि मिलने के तीन माह के भीतर किचन गार्डन तैयार कर उसकी गुणवत्ता की जांच के लिए जियो टैगिंग कराई जाए। जिन विद्यालयों में पर्याप्त स्थान नहीं है, वहां गमलों, जूट के थैलों या बोरों में सब्जियां उगाने को कहा गया था। हालांकि कुछ विद्यालयों में इस दिशा में काम हुआ है, लेकिन अधिकांश स्थानों की स्थिति निराशाजनक है। जिले में पहले से बने 500 से अधिक किचन गार्डन भी निष्क्रिय पड़े हैं। वहां भी सब्जियों की जगह घास उग आई है।