वाराणसी, ।पर्व-त्योहारों को लेकर पिछले कुछ वर्षों से आ रहे मतभेद पर काशी के पंचांग और ज्योतिष के विद्वान एक मंच पर आए हैं। मंगलवार को बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान काशी के विद्वानों ने यह घोषणा की कि पूरे देश में दीपावली का पर्व 31 अक्तूबर को मनाया जाएगा। बताया कि भ्रम की स्थिति धर्मशास्त्रत्त् के ग्रंथों का पूर्वापर संबंध स्थापित कर अध्ययन न करने से बनी है। तिथि निर्णय के पीछे उन्होंने धर्मशास्त्रत्तें के अनुसार तर्क भी दिये।

- ओड़ीशा : जनगणना कार्य में लगे दो शिक्षकों की लू लगने से मौत
- जनगणना कार्य से इनकार, 142 शिक्षकों पर बर्खास्तगी की तलवार
- सख्ती : डीएम ने चल रहे जनगणना प्रशिक्षण का औचक निरीक्षण किया, कर्मचारी अनुपस्थित मिले कारण बताओ नोटिस जारी
- जीपीएफ व पेंशन को तरसे शिक्षक
- मानव संपदा पोर्टल में बड़ा खेल उजागर, संबद्ध चपरासियों ने खुद को बनाया ऑफिस असिस्टेंट
बीएचयू से प्रकाशित विश्व पंचांग के समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि शास्त्रत्तें में दीपावली निर्णय के लिए मुख्यकाल प्रदोष में अमावस्या का होना जरूरी माना गया है। इस वर्ष प्रदोष (2 घंटे 24 मिनट) और निशीथ (अर्धरात्रि) में अमावस्या 31 अक्तूबर को पड़ रही है इसलिए 31 को ही दीपावली मनाना शास्त्रत्त्सम्मत है। देश के किसी भी भाग में 1 नवंबर को पूर्ण प्रदोष काल में अमावस्या की प्राप्ति नहीं है, अत 1 नवम्बर को किसी भी मत से दीपावली मनाना शास्त्रत्तेचित नहीं है।
2024 में पारम्परिक गणित द्वारा निर्मित पंचांगों में कोई भेद नहीं है क्योंकि उन सभी के अनुसार अमावस्या 31 अक्तूबर को सूर्यास्त के पहले होकर 1 नवंबर को सूर्यास्त के पूर्व ही समाप्त भी हो जा रही है।