प्रयागराज। सात साल तक एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती का इंतजार करते रहे लाखों अभ्यर्थी एक झटके में भर्ती की दौड़ से बाहर हो गए। ओवरएज अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में शामिल होने के लिए उन्हें अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने जब 14 जुलाई को भर्ती का संक्षिप्त विज्ञापन जारी किया तो ओवरएज अभ्यर्थियों की सभी उम्मीदें टूट गईं। संक्षिप्त विज्ञापन में अधिकतम आयु सीमा में कोई छूट नहीं दी गई।

अब 28 जुलाई को भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी होने वाला है और उसी दिन से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होगी। ओवरएज अभ्यर्थियों को अब भी उम्मीद है कि विस्तृत विज्ञापन जारी होने तक शासन व आयोग उनके हित में कोई फैसला ले सकते हैं, लेकिन अब इसके आसार भी कम हैं।
एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती का पिछला विज्ञापन मार्च-2018 में आया था। सात साल बाद नई भर्ती आने वाली है। भर्ती के इंतजार में लाखों अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं। अभ्यर्थी अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट चाहते हैं।
प्रतियोगी छात्रा अर्चना ने बताया कि उनकी उम्र 40 वर्ष दो माह हो गई। ऐसे में वह फॉर्म नहीं भर पाएंगी। अगर इस भर्ती का विज्ञापन हर साल नियमित अंतराल में आता तो वह 2019 से अब तक छह बार परीक्षा में शामिल
14 जुलाई को जारी संक्षिप्त विज्ञापन में अभ्यर्थियों को आयु सीमा में नहीं दी गई कोई छूट
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग 28 को जारी करेगा विस्तृत विज्ञापन राहत के आसार नहीं
होतीं। अर्चना को यकीन है कि अब तक उनका चयन हो गया होता, लेकिन 2018 के बाद उनके जैसे लाखों अभ्यर्थियों को कोई मौका ही नहीं मिला।
प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे रायबरेली के संदीप कुमार, अनुज कुमार तिवारी, आलोक सिंह, मंजू यादव, सचिन शुक्ला, खुशबू सिंह, झांसी की रमा, चंदन राय गोरखपुर की ज्योति मिश्रा, प्रयागराज के सामंत पांडेय समेत कई अन्य छात्र भी भर्ती के इंतजार में ओवरएज हो चुके हैं और इस बार फॉर्म भरने से वंचित रह जाएंगे।
प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधिमंडल की ओर से शीतला प्रसाद ओझा ने मुख्यमंत्री व आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि जिस तरह आरक्षी भर्ती में मानवता के आधार पर अभ्यर्थियों को तीन वर्ष की छूट दी गई, उसी तरह एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में भी ओवरएज अभ्यर्थियों को पांच साल की छूट दी जाए। इससे लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी। ब्यूरो
परीक्षा की तारीख तक नहीं घोषित कर सका आयोग
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन को दो साल हो गए हैं। आयोग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय को कार्यभार ग्रहण किए 10 माह से अधिक हो चुका है, जबकि आयोग के 12 सदस्यों की नियुक्ति तो अध्यक्ष से पहले मार्च-2019 में ही कर दी गई थी। आयोग के गठन की तैयारी वर्ष 2022 में ही शुरू कर दी गई थी। गठन के नाम पर अशासकीय विद्यालयों में टीजीटी-पीजीटी के 4163 पदों एवं अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों पर भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई थी। आयोग का गठन जिस उद्देश्य से किया गया, वह अब तक पूरा ही नहीं हुआ।
टीजीटी-पीजीटी परीक्षाएं तीन बार स्थगित की जा चुकी हैं। इसकी वजह से फॉर्म भरने वाले 13.19 लाख अभ्यर्थी परेशान हैं। हद तो तब हो गई जब आयोग ने बिना कोई नोटिस जारी किए टीजीटी परीक्षा स्थगित कर दी, जिसके लिए 8.69 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। टीजीटी-पीजीटी परीक्षा कब होगी, इस पर आयोग ने अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। वहीं, 16 और 17 अप्रैल 2025 को हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की लिखित परीक्षा का परिणाम भी अब तक घोषित नहीं किया गया है। परीक्षा में गड़बड़ी आने के बाद शासन ने चार सदस्यीय टीम का गठन किया था, जिसकी निगरानी में परीक्षा परिणाम तैयार किया जाना है। आयोग नई भर्ती शुरू करने में भी अब तक विफल रहा है।