Home PRIMARY KA MASTER NEWS बोले शिक्षक’: पुरानी पेंशन मिले, पेयरिंग में रखें दूरी का ख्याल

बोले शिक्षक’: पुरानी पेंशन मिले, पेयरिंग में रखें दूरी का ख्याल

by Manju Maurya

बिजनौर, परिषदीय स्कूलों में पेयरिंग का विरोध चल रहा है और अध्यापक पेयरिंग व्यवस्था को तत्काल बंद करने की मांग कर रहे हैं। परिषदीय स्कूलों के पेयरिंग के विरोध में मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा जा रहा है और साथ ही स्कूल से लेकर सड़क तक प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान अध्यापक ज्ञापन में कह रहे हैं कि पेयरिंग से सहायक और प्रधानाध्यापक के पद समाप्त हो जाएंगे। पेयरिंग से निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। स्कूलों के बच्चों को दूसरे स्कूल में जाने को परेशानी उठानी पड़ेगी। जो बच्चे अपने गांव में नहीं जा रहे वह गांव से दूर विद्यालय में कैसे जाकर शिक्षा लेंगे।

परिषदीय स्कूलों में चल रही पेयरिंग व्यवस्था को बंद करने की मांग की जा रही है ताकि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का शिक्षा का मूल अधिकार सुरक्षित रह सकें। सरकारी स्कूलों में पेयरिंग व्यवस्था चल रही है। इस व्यवस्था से कम छात्र वाले स्कूलों के बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। इससे स्कूलों में छात्र संख्या सम्मानजनक हो जाएंगी। काफी स्कूलों में पेयरिंग हो गई तो काफी स्कूलों को पेयरिंग के लिए चिन्हित कर लिया गया है। परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में पेयरिंग के आदेश से जिले भर के शिक्षक आक्रोशित है। शिक्षक संगठनों ने इसके विरोध में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी इसके विरोध में आंदोलन शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों को मर्ज करने का निर्णय आत्मघाती साबित होगा। सरकार को इस आदेश को तत्काल वापस लेना चाहिए। हमें हर बच्चे को शिक्षा के जोड़ने की जरूरत है ना की शिक्षा से तोड़ने की। आदेश के विरोध में शिक्षक संघों द्वारा ब्लॉक स्तर पर बैठक कर विरोध जताया है। दूसरे चरण में जनप्रतिनिधियों को मांग पत्र देकर विरोध किया गया है । शिक्षक राजेन्द्र कुमार, प्रशांत सिंह, अरविंद चौधरी, हरवंत सिंह, भूपेन्द्र चौहान ने कहा कि 6 जुलाई को 7 लाख ट्वीट कर पेयरिंग करने का विरोध किया गया है तथा अब 8 जुलाई को जिला मुख्यालय पर भी प्रदर्शन कर विद्यालयों के पेयरिंग का विरोध किया जाएगा। शिक्षकों ने बताया कि जिले में कम संख्या वाले 151 स्कूलों को मर्ज किया गया है। प्रदेश भर में करीब 27000 स्कूलों पेयरिंग करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। शिक्षिका अनीता रानी, तरनजीत कौर, अलका, मीनू सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद शर्मा, महामंत्री ठाकुर संजय सिंह ने स्कूलों के पेयरिंग के विरोध में आंदोलन शुरू कर दिया है। विद्यालयों को पेयरिंग करने से शिक्षा व्यवस्था चौपट नजर आ रही है। जिले में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार चौहान ,जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, जिला मंत्री प्रशांत सिंह के नेतृत्व में स्कूलों से लगातार विरोध किया जा रहा है। जिलाध्य भूपेंद्र कुमार चौहान ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर बैठक कर विद्यालय प्रबंध समिति ने स्कूलों के पेयरिंग के विरोध में प्रस्ताव पारित किया है साथ ही ग्राम प्रधान संघ ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। कई सामाजिक संगठनों ने पेयरिंग का विरोध किया है। जिला मंत्री प्रशांत सिंह के मुताबिक ब्लॉक स्तर पर जनप्रतिनिधियों को मांग पत्र देकर स्कूलों के मर्ज का विरोध जताया गया है। पेयरिंग का चल रहा विरोध, सात लाख हुए ट्वीट जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि पेयरिंग का विरोध चल रहा है। रविवार को प्रदेश में सात लाख ट्वीट कर आदेश का विरोध किया है। बड़ी संख्या में जिले से भी ट्वीट हुए हैं। शिक्षकों ने कहा कि स्कूलों में पेयरिंग सफल रहा तो आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों की भर्ती नहीं होगी जिससे युवाओं को रोजगार से वंचित कर दिया जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि बेरोजगारी भी बढ़ेगी तथा बड़ी संख्या में गरीब वह वंचित समाज के बच्चे दूर दराज के स्कूलों में शिक्षा ग्रहण नहीं जा पाएंगे। पहले ही जिले में 450 स्कूलों को कंपोजिट किया जा चुका है। विद्यालय को मर्ज करने से जिले में रोजगार के अवसर भी समाप्त हो जाएंगे। बिना मान्यता के चल रहे स्कूल और मदरसों को किया जाए बंद शिक्षकों का कहना था कि धड़ल्ले से चल रहे जिले में फर्जी स्कूल में फर्जी मदरसों को बंद किया जाना चाहिए। शिक्षकों ने पेयरिंग के आदेश को तुगलगी फरमान बताते हुए आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया है। शिक्षकों का कहना है कि जिले में चल रहे बिना मान्यता के स्कूलों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरे स्कूलों में जाने के लिए बच्चों को रहेगा गुलदार का खतरा जिले में गुलदार का आतंक चल रहा है। ऐसे में गुलदार का खतरा बना हुआ है। बच्चे पेयरिंग के बाद दूसरे स्कूल में जाएंगे तो रास्ते में उन्हें गुलदार का खतरा रहेगा। जो अभिभवक बच्चों की शिक्षा को लेकर गम्भीर नहीं हैं और गांव के स्कूलों में भी बच्चों को नहीं भेजते हैं वह दूसरे स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के लिए कैसे भेजेंगे। ——— सुझाव 1. स्कूलों में पेयरिंग नहीं होनी चाहिए। 2. स्कूल में छात्र संख्या कम हो तो शिक्षकों को भी कम किया जाए। 3. विद्यालय बंद नहीं होने चाहिए। 4. शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। 5. पेयरिंग होने से रोजगार के अवसर कम होंगे। ———- शिकायतें 1. पेयरिंग से स्कूल बंद हो जाएंगे। 2. गरीबों के बच्चों को दूसरे स्कूल जाने में परेशानी होगी। 3. बच्चों के लिए यातायात के साधन नहीं है। 4. बच्चों को दूसरे स्कूलों में जाने के लिए गुलदार का खतरा रहेगा। 5. पेयरिंग होने से रोजगार के अवसर कम होंगे। हमारी सुनो बात संगठन विद्यालयों को पेयरिंग करने के विरोध में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चला रहा है। स्कूलों का पेयरिंग ठीक नहीं है। इसके विरोध में बीएससी कार्यालय पर 8 जुलाई को प्रदर्शन किया जाएगा। – भूपेन्द्र चौहान जिलाध्यक्ष, उ.प्र. प्राथमिक शिक्षक संघ विद्यालय युग्मन के विरोध में रविवार को चिल्ड्रन फॉर जस्टिस अभियान के तहत सात लाख ट्वीट किए गए हैं। संगठन लगातार इसका विरोध कर रहा है। सरकार को निर्णय वापस लेने की जरूरत है। – राजेंद्र कुमार वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उ.प्र. प्राथमिक शिक्षक संघ प्रदेश के अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में विद्यालय समायोजन के विरोध में आंदोलन तेज किया जाएगा। स्कूलों में शिक्षक कड़ी मेहनत कर रहे हैं। तुगलगी फरमान लागू नहीं किए जाने चाहिए। – प्रशांत सिंह, जिला मंत्री, उ. प्र. प्राथमिक शिक्षक संघ शिक्षा बच्चों का अधिकार है। विद्यालय को पेयरिंग किए जाने से काफी संख्या में बच्चों से उनका अधिकार छीन लिया जाएगा। ऐसे में साक्षरता दर पर भी असर पड़ेगा। हर बच्चे को शिक्षा मिलनी जरूरी है। – अरविंद चौधरी आरटीई के तहत 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को शिक्षा मिलनी जरूरी है। शासन से आए निर्देश पर ऐसे में तो बच्चों से उनका हक छीन लिया जाएगा। – हरवंत सिंह शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है विद्यालयों को पेयरिंग कर बच्चों से उनका अधिकार छिनने की कोशिश की जा रही है। संगठन विरोध में आंदोलन चला रहा है। हम शिक्षक संघ के साथ है, स्कूलों को बंद नहीं होने देंगे। – गौरव चौधरी स्कूलों की पेयरिंग कर सबसे ज्यादा फर्क बालिका शिक्षा पर पड़ेगा, जबकि बालिकाओं को अच्छी शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है। वर्तमान में पेयरिंग करने की जरूरत नहीं है। – तरनजीत कौर मलिक स्कूलों के पेयरिंग से कहीं न कहीं हम शिक्षा से भटक रहे हैं। शासन को इस पर विचार कर निर्णय वापस लेने की जरूरत है। वर्तमान में प्राइमरी पाठशालाएं कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रही है। – मीनू सिंह वर्तमान में फर्जी विद्यालय भी बड़ी संख्या में चल रहे हैं। फर्जी विद्यालय को बंद करने की जरूरत है। जिले में बड़ी संख्या में चल रहे फर्जी विद्यालय बंद हो गए, तो परिषदीय स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ेगी। वर्तमान में प्राइवेट स्कूलों में मदरसों पर भी अंकुश लगाने की जरूरत है। – अनीता रानी स्कूलों की पेयरिंग समस्या का समाधान नहीं है। जरूर सिस्टम को सुधारने की है। स्कूलों की पेयरिंग करके रोजगार के अवसर भी खत्म होंगे। – अलका यादव आरटीई के नियमों का पालन किया जाना चाहिए, शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत हर बच्चे को शिक्षा दी जानी चाहिए। पेयरिंग का खेल खत्म होना चाहिए। – रचना कश्यप स्कूलों को पेयरिंग करने से विद्यालय की दूरी भी बढ़ जाएगी। बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर दराज नहीं जा सकते। प्राइमरी विद्यालय में 6 से 14 साल की आयु के बच्चे पढ़ते हैं। इन्हें दूसरे गांव के विद्यालय में शिक्षा के लिए भेजना गलत है। – प्रीति रानी स्कूल पेंटिंग के मसले पर वह शिक्षक संघ के साथ है जो भी संगठन का निर्णय होगा उसका पालन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी संसाधनों का अभाव है। एसएमएस स्कूलों को मर्ज करना गलत है। – शालू शौरियान पिछले तीन-चार सालों में परिषदीय विद्यालय में मिशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में काफी परिवर्तन हुआ है। अब शासन ने कम छात्र संख्या के नाम पर स्कूल ऑन का समायोजन करने का खेल कर शिक्षक व अभिभावकों की भावना से खिलवाड़ किया है। इस आदेश से काफी संख्या में वांछित गरीब समाज के बच्चे शिक्षा से दूर हो जाएंगे। – लक्ष्मी देवी शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है उसको अच्छी शिक्षा दी जानी चाहिए। स्कूलों को मर्ज करना अच्छी शिक्षा का समाधान नहीं है। प्रत्येक गांव में स्कूल होना जरूरी है। गरीब परिवारों के बच्चों का दूसरे गांव में शिक्षा के लिए जाना मुश्किल काम होगा। – डा. शुची शर्मा ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी संसाधनों का अभाव है। स्कूलों को पेयरिंग करने से दूसरे गांव में बच्चों का पैदल पहुंचना भी मुसीबत का सबब होगा। स्कूलों की पेयरिंग नहीं की जानी चाहिए। – संकेत सिंह स्कूलों को पेयरिंग कर बच्चों को शिक्षा से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिस संगठन कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। स्कूलों को मर्ज करने के विरोध में आंदोलन तेज किया जाएगा। – धर्म सिंह विद्यालय को मर्ज करना अच्छी शिक्षा के संकेत नहीं है। इससे साक्षरता दर पर भी असर पड़ सकता है। छोटे-छोटे बच्चों का 3-4 किलोमीटर की दूरी पर विद्यालय पहुंचना कठिन काम होगा। आदेश को तुरंत वापस लेने की जरूरत है। – मंजुला बनिक विद्यालय को मर्ज करने से शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ेगा। काफी बच्चे शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि हर बच्चे को अच्छे शिक्षा मिले इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है न कि विद्यालय को पेयरिंग करने की। – गीता विद्यालय को पेयरिंग करने के आदेश से शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतर गई है। आए दिन नए-नए आदेश होने से शिक्षण कार्य भी प्रभावित होगा। विद्यालय को पेयरिंग करने से लगता है। निजीकरण की तरफ जा रहे हैं जो गलत कदम है। – अंशिका

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