अनुसंधान
इंटरनेट मीडिया पर अधिक समय बिता रहे हैं तो सावधान हो जाएं। एक अध्ययन के अनुसार, स्मार्टफोन पर इंटरनेट मीडिया रील्स को केवल एक घंटे तक स्क्राल करना आंखों की थकान का कारण बन सकता है। शोध दल ने कहा कि 20 मिनट से अधिक समय तक स्मार्टफोन का उपयोग करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं संभव हैं जिनमें मनो-शारीरिक विकार शामिल हैं।

शोध का निष्कर्ष जर्नल आफ आई मूवमेंट रिसर्च में प्रकाशित हुआ है। इसमें पाया गया है कि केवल डिजिटल उपकरणों पर बिताया गया समय ही नहीं बल्कि उपयोग की जाने वाली सामग्री का प्रकार भी उक्त स्थिति का कारण बन सकता है। एसआरएम इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी
के शोधकर्ताओं ने कहा कि इंटरनेट मीडिया सामग्री पढ़ने या वीडियो देखने की तुलना में पुतली के अधिक उतार-चढ़ाव का कारण बनती है। डिजिटल उपकरणों और नीली रोशनी के लंबे समय तक संपर्क से आंखों की थकान, नींद संबंधी विकार और दृष्टि से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं। शोधकर्ताओं ने युवा भारतीय वयस्कों में एक घंटे के स्मार्टफोन उपयोग से आंखों पर थकान के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक पोर्टेबल, कम लागत वाला सिस्टम विकसित किया जिसने दृश्य गतिविधि को मापा। रील्स में स्क्रीन के उतार-चढ़ाव में वृद्धि होती है जो पुतली के फैलाव को प्रभावित करती है और मानसिक रूप से भी थकाती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि 60 प्रतिशत प्रतिभागियों ने लंबे समय तक स्मार्टफोन के उपयोग के बाद हल्की से गंभीर असुविधा का अनुभव किया।