लखनऊ। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में लगे शिक्षामित्रों व कर्मचारियों की मौत से शिक्षक संगठनों में काफी नाराजगी है। शिक्षकों का कहना है कि उनका काम शिक्षण कार्य है लेकिन प्रशासन जबरन उनसे निर्वाचन से जुड़े कार्य कराता है। आरोप लगाया कि काम के दबाव से शिक्षक काल के गाल में समा रहे हैं। पड़ित परिजनों को सरकारी नौकरी व एक करोड़ मुआवजा दिया जाए।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट)
ने आरोप लगाया कि बीएलओ पर प्रशासनिक अधिकारी लक्ष्य पूरा करने का दबाव डालते हैं। तकनीकी समस्याओं व सामाजिक सहयोग न मिलने से लक्ष्य पूरा नहीं होने पर वेतन रोकने की धमकी दी जाती है। कुछ बीएलओ ऐसे हैं जो पहली बार नियुक्त किए गए हैं। वे दबाव के चलते काल के गाल में समा रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि विभिन्न जिलों से शिक्षकों के इस मामले में फोन आ रहे हैं। यह अव्यावहारिक व निंदनीय है।