प्रयागराज,
कर्मचारी चयन आयोग ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और एसएसएफ में कांस्टेबल (जीडी), असम राइफल्स में राइफलमैन (जीडी) परीक्षा 2026 के तहत कुल 25487 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। इनमें पुरुष वर्ग में 23467 और महिला वर्ग में 2020 पद शमिल हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 31 दिसंबर की रात 11 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन फीस एक जनवरी 2026 की रात 11 बजे तक जमा होगी। ऑनलाइन

आवेदन पत्र में सुधार के लिए विंडो (सुधार शुल्क के ऑनलाइन भुगतान सहित) आठ से दस जनवरी की रात 11 बजे तक खुली रहेगी।
पहले चरण की कंप्यूटर आधारित परीक्षा फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच संभावित है। एसएससी ने साफ किया है कि पदों की संख्या संभावित है और यह घट या बढ़ सकती है। इसके माध्यम से सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), सचिवालय सुरक्षा बल (एसएसएफ) तथा असम राइफल्स में भर्ती की जाएगी।
हर नए स्मार्टफोन में होगा सरकार का सुरक्षा कवच, मोबाइल कंपनियों को 90 दिन का अल्टीमेटम प्रीलोड एप डिलीट करना होगा नामुमकिन
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सभी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को भारत में हर नए स्मार्टफोन में पहले से सरकार का साइबर सुरक्षा एप ‘संचार साथी’ अपलोड करने का निर्देश दिया। दूरसंचार विभाग ने स्मार्टफोन निर्माताओं को इसके लिए तीन महीने का अल्टीमेटम दिया है।
साइबर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूरसंचार विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया कि मोबाइल कंपनियों को 90 दिन यानी फरवरी, 2026 के अंत तक देश में निर्मित या आयातित सभी नए हैंडसेट में संचार साथी एप देना होगा। इस प्री लोडेड एप को डिलीट करना नामुमकिन होगा। यूजर इसे न तो हटा सकेंगे
और न डिसेबल कर सकेंगे। कंपनियों को सुनिश्चित करना होगा कि यह एप डिवाइस सेटअप के बाद यूजर्स को आसानी से दिखाई दे और सुलभ हो।
निर्देशों के अनुसार, ऐसे सभी उपकरणों के लिए, जो पहले ही निर्मित हो चुके हैं और भारत में विक्री चैनलों में हैं, उसमें एप को सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। निर्देश में कहा गया है, भारत में इस्तेमाल के लिए बनने वाले मोबाइल हैंडसेट के सभी निर्माता और आयातक इन निर्देशों के जारी होने के 120 दिनों के भीतर दूरसंचार विभाग को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
संचार साथी क्यों जरूरी: इस कदम का मुख्य उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी से लड़ना और सुरक्षा बढ़ाना है। यह एप यूजर्स के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। यह खोए या चोरी हुए फोन को आईएमईआई नंबर के आधार पर ट्रैक करने और ब्लॉक करने में मदद करता है। यूजर अपने नाम पर रजिस्टर्ड फर्जी या संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन की पहचान कर सकते हैं। यह अवैध और नकली आईएमईआई नंबरों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए जरूरी है। इन्हीं आईएमईआई नंबरों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की जाती है।
इन कंपनियों के लिए चुनौती: इस आदेश से एपल, सैमसंग, शियाओमी, वीवो और ओप्पो जैसी बड़ी कंपनियों को सीधे तौर पर चुनौती मिलेगी। इनमें एपल विशेष रूप से अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में गैर-जरूरी थर्ड पार्टी एप को प्री-इंस्टॉल करने का कड़ा विरोध करती रही है। दूरसंचार विभाग ने स्पष्ट किया कि अगर कंपनियां निर्देश का पालन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।