सुसाइड नोट में तीनों शिक्षकों से 48 लाख रुपये लेने का किया है दावा
काम न होने पर थे निराश रविवार को ही पैसा लेता था लिपिक संजीव
गोरखपुर, । सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या से पहले लिखे चार पन्नों के सुसाइड नोट में घूसखोरी के पूरे प्रकरण का विस्तार से उल्लेख किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। सुसाइड नोट में उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी देवरिया कार्यालय के साथ ही उस विद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं, जहां उनकी नियुक्ति हुई थी।
सुसाइड नोट के अनुसार कृष्ण मोहन सिंह और उनके दो साथी शिक्षकों ओंकार सिंह व अपर्णा तिवारी से कुल 48 लाख रुपये घूस के रूप में लिए गए। उन्होंने लिखा है कि पहले 20-20 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसे बाद में 16-16 लाख रुपये पर तय किया गया। इस प्रकार तीनों से कुल 48 लाख रुपये देने की बात तय हुई। उन्होंने उल्लेख किया है कि 27 जुलाई 2025 को तीनों ने 7-7 लाख रुपये, कुल 21 लाख रुपये, देवरिया मेन रोड पर बीएसए कार्यालय जाने वाली सड़क पर स्थित पौधशाला के पास दिए। कृष्ण मोहन ने लिखा है कि 13 मई को दुर्घटना में वह घायल हो गए थे, इसलिए पहली किस्त में उनके हिस्से के सात लाख रुपये ओंकार सिंह और उनके भाई द्वारा पहुंचाए गए, जबकि अपर्णा तिवारी अपने पति के साथ पैसा देने गई थीं। इसके बाद 14 अगस्त 2025 को तीनों को बीएसए कार्यालय बुलाया गया और कुछ दिन बाद शेष 9-9 लाख रुपये
(कुल 27 लाख) की मांग की गई। सुसाइड नोट में दावा है कि दूसरी किस्त का भुगतान नवंबर 2025 में किया गया। ओंकार सिंह ने पत्नी के गहने और दो बीघा जमीन गिरवी रखकर रकम जुटाई। कृष्ण मोहन सिंह ने भी अपनी पत्नी के गहने 4 लाख 24 हजार रुपये में गिरवी रखे और शेष रकम रिश्तेदारों से उधार लेकर बैंक सेनिकाली। उन्होंने लिखा है कि 23 नवंबर को नौ लाख रुपये स्वयंले जाकर दिए, क्योंकि कार्यालय का बाबू संजीव सिंह केवल रविवार को ही पैसा लेता था। सुसाइड नोट में यह भी उल्लेख है कि भुगतान के बावजूद कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी, जिससे वे अत्यंत निराश और मानसिक रूप से परेशान हो गए थे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भविष्य में और लोग भी शिकार हो सकते हैं। कृष्ण मोहन सिंह ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता की जांच कर रही है और प्रकरण में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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