इविवि व कॉलेजों में इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों पर जोर, चार वर्षीय बीए-बीएड कोर्स की तैयारी
प्रयागराज। नई शिक्षा नीति के तहत बीएड की पढ़ाई का तरीका भी बदलने जा रहा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय व संघटक कॉलेजों में इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों पर जोर है। इसी के तहत चार वर्षीय बीएड की पढ़ाई की भी तैयारी है। विवि में इसके लिए अनुमति मिल गई है। इसी क्रम में कॉलेजों की ओर से भी इसका प्रस्ताव भेजा गया है।

विवि व संघटक कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 से स्नातक में सेमेस्टर लागू कर दिया गया है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक अब चार वर्ष का होगा। इसी के तहत भावी शिक्षकों को भी नई पढ़ाई करनी होगी। बीएड में चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी बीए-बीएड) कोर्स शुरू होने जा रहा है।
विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग के अंतर्गत 50 सीट के लिए नेशनल कांउसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) से मान्यता मिल गई है। अगले सत्र से इसमें प्रवेश लिए जाएंगे। इसके तहत स्नातक के साथ बीएड की डिग्री मिलेगी।
इसके अलावा सीएमपी व एसएस खन्ना महाविद्यालय में भी आईटीईपी
(बीए-बीएड) की पढ़ाई होगी। इसके लिए एनसीटीई को प्रस्ताव भेजा गया है। पढ़ाई शिक्षा शास्त्र विभाग के अंतर्गत होगी। एनसीटीई की ओर से कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिन्हें पूरा किया जा रहा है। आगामी सत्र से इन कॉलेजों में भी चार वर्षीय बीएड कोर्स शुरू होने की उम्मीद है।
बनी हुई है बीएड की मांग
माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापक बनने के लिए बीएड अनिवार्य हो गया है। सहायक अध्यापक (ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर) के लिए बीएड पहले से अनिवार्य है। अब प्रवक्ता के लिए भी इसे अनिवार्य कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से राजकीय इंटर कॉलेजों में सहायक अध्यापक एवं प्रवक्ता भर्ती के लिए आवेदन लिए जा चुके हैं। दोनों भर्तियों में बीएड अनिवार्य है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से भी टीजीटी व पीजीटी (प्रवक्ता) के 20 हजार से अधिक पदों के लिए जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें भी टीजीटी में बीएड अनिवार्य होगा। इसके अलावा पीजीटी के लिए बीएड अनिवार्य किए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी शिक्षक बनने के लिए बीएड अभ्यर्थियों के लिए अधिक अवसर हैं। इससे बीएड की मांग लगातार बनी हुई है।