प्रयागराज, 22 अप्रैल 2026।
*इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने* सहायक शिक्षकों के स्थानांतरण और अधिशेष शिक्षकों के पुनःस्थापन (redeployment) को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, डेटा-आधारित और नियमसम्मत होनी चाहिए। न्यायमूर्ति श्री सौमित्र दयाल सिंह जी एवं न्यायमूर्ति मैडम स्वरूपमा चतुर्वेदी जी की खंडपीठ ने स्पेशल अपील संख्या 398/2026 में सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

*क्या कहा कोर्ट ने?*
न्यायालय ने सबसे महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि *प्रत्येक विद्यालय में कम से कम दो शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है।* जब तक यह न्यूनतम व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अन्य प्रकार के स्थानांतरण नहीं किए जाएंगे।
*UDISE डेटा पर सवाल, भौतिक सत्यापन अनिवार्य*
याचिकाकर्ताओं ने सरकार द्वारा उपयोग किए जा रहे UDISE पोर्टल के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि—
30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों का भौतिक सत्यापन किया जाए
केवल सत्यापित डेटा के आधार पर ही ट्रांसफर और पुनःस्थापन की प्रक्रिया चले
*जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होगी प्रक्रिया*
कोर्ट ने कहा कि 14 नवंबर 2025 के शासनादेश के तहत गठित जिला स्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे, पूरी प्रक्रिया संचालित करेगी।
*डेटा का संयुक्त प्रमाणीकरण—*
प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य, खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
*शिक्षकों को मिलेगा आपत्ति दर्ज करने का अवसर*
6 मई 2026 तक सभी डेटा वेबसाइट पर अपलोड होंगे
13 मई 2026 तक प्रभावित शिक्षक अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे
समिति सभी आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम निर्णय लेगी
महिला शिक्षकों को विशेष राहत
कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला अधिशेष शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर—
पहले उसी ब्लॉक में
अन्यथा निकटतम ब्लॉक में
तैनात किया जाए, विशेषकर उनके निवास के आसपास।
फिलहाल इन स्कूलों में नहीं होगा बदलाव
जहां पहले से ही 2 शिक्षक कार्यरत हैं, वहां फिलहाल कोई पुनःस्थापन नहीं किया जाएगा।
*अंतरिम राहत जारी*
कोर्ट ने पूर्व में दी गई अंतरिम सुरक्षा को अगली सुनवाई (22 मई 2026) तक जारी रखा है।
*क्या है इस आदेश का असर?*
यह आदेश प्रदेश के हजारों शिक्षकों के स्थानांतरण पर सीधा प्रभाव डालेगा। अब बिना सत्यापित डेटा और पारदर्शी प्रक्रिया के कोई भी ट्रांसफर आदेश जारी नहीं किया जा सकेगा।