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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में द्विविवाह (Bigamy) के आरोप में बर्खास्त किए गए शिक्षक को बड़ी राहत देते हुए उसकी सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा के शिक्षकों पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 लागू नहीं होती, बल्कि वे केवल उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 से शासित होते हैं।
मामला तुफैल अहमद बनाम राज्य उत्तर प्रदेश से संबंधित है, जिसमें याची को 25 जुलाई 2019 को द्विविवाह के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने पहली पत्नी को तलाक देने के बाद दूसरी शादी की, जिस पर दूसरी पत्नी के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जिला प्रशासन की संस्तुति पर विभागीय कार्रवाई करते हुए बर्खास्तगी का आदेश पारित किया गया।

याची की ओर से तर्क दिया गया कि सेवा नियमावली, 1981 में द्विविवाह पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है और न ही 1956 की आचरण नियमावली शिक्षकों पर लागू होती है। साथ ही, दूसरी शादी का तथ्य भी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुआ था, क्योंकि संबंधित वाद अनुपस्थिति के कारण खारिज हो चुका था।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए पाया कि बर्खास्तगी का आदेश नियमों के गलत अनुप्रयोग पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि 1956 की नियमावली को शिक्षकों पर लागू मानना विधिसम्मत नहीं है। इसके अतिरिक्त, द्विविवाह का आरोप भी विधिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ।
इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने 25 जुलाई 2019 के बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए याची की सेवा बहाल करने और विधि अनुसार वेतन देने का निर्देश दिया।
यह निर्णय बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के सेवा संबंधी मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।