नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हाई कोर्ट के कुछ सेवानिवृत्त जजों को 6,000 से 15,000 रुपये के बीच मिलने वाली मामूली पेंशन पर हैरानी जताई। जस्टिस बीआर गवई, पीके मिश्रा और केवी विश्वनाथन की पीठ हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने कहा है कि उन्हें महज 15,000 रुपये पेंशन मिल रही है।

- वित्तीय वर्ष 2026-27 में बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा नियुक्त शिक्षा मित्रों के मानदेय भुगतान के लिए धन आवंटित किया गया
- इस राज्य में में भी जनगणना कार्य में मार्क ऑन ड्यूटी, देखें आदेश
- 18 महीने का कोरोना काल का बकाया एरियर जल्द देंगे-वित्त मंत्री
- इलाहाबाद हाई कोर्ट की डबल बेंच ने समायोजन 3 को त्रुटिपूर्ण मानते हुए फिर से समायोजन करने का ऑर्डर दिया। 30 अप्रैल 2026 की छात्र संख्या पर होगा समायोजन, देखें
- UPSSSC फॉरेस्ट गार्ड भर्ती 2026 का विज्ञापन जारी
जिला अदालत में 13 साल तक न्यायिक अधिकारी के तौर पर सेवा देने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज के तौर पर पदोन्नत हुए याचिकाकर्ता ने दावा किया कि अधिकारियों ने पेंशन की गणना करते समय उनकी न्यायिक सेवा पर विचार करने से इनकार कर दिया है।
पीठ ने टिप्पणी की कि अगर हमारे सामने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज हैं, जिन्हें 15,000 रुपये पेंशन मिल रही है, तो यह चौंकाने वाली बात है। ऐसा कैसे हो सकता है? न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि प्रत्येक उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद की सुविधाएं अलग-अलग हैं और कुछ राज्यों में बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। शीर्ष अदालत ने सुनवाई 27 नवंबर के लिए निर्धारित की