इटवा इटवा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय भदोखर में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक शौकिंद्र गौतम ने वेतन न मिलने से परेशान होकर दवा की ओवरडोज ले ली। देर रात तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। उपचार के बाद उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) इटवा द्वारा लगातार प्रताड़ित किए जाने से उन्होंने यह कदम उठाया। जनपद बागपत निवासी शौकिंद्र गौतम इटवा थाना के महादेव घुरहू गांव में किराए के मकान में रह कर प्राथमिक विद्यालय भदोखर में प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।

बीईओ कार्यालय की ओर से बच्चों का आधार कार्ड न बनने के चलते छह शिक्षकों का वेतन रोका गया था। बाद में अन्य शिक्षकों का वेतन बहाल हो गया, परंतु शौकिंद्र का वेतन दो माह से रुका रहा।
शौकिंद्र ने इस संबंध में बीएसए को पत्र भेजकर अपनी स्थिति बताई थी, जिस पर बीएसए ने वेतन भुगतान
बीमार हुआ शिक्षक इटवा सीएचसी पर चल रहा इलाज जागरण
शिक्षक द्वारा दवा सेवन की जानकारी इंटरनेट मीडिया से मिली। बीईओ पर प्रताड़ना की भी तीन सूचना है। इसे गंभीरता से लेकर सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। शुक्रवार शाम तक रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी। डा. राजा गणपति आर, जिलाधिकारी
का निर्देश भी दिया, मगर इसके बाद बीईओ ने रोक जारी रखी कि जब तक सभी रजिस्टर आनलाइन नहीं होंगे, आख्या नहीं लगाई जाएगी। शिक्षक व बीईओ के बीच व्हाट्सएप चैटिंग भी हुई, बाद में इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गई। शिक्षक ने दीपावली के पहले घर जाने की इच्छा जताई और कहा कि सभी का वेतन जारी कर दिया गया है, केवल उनका रोका गया है। यह भी लिखा कि वे मानसिक रूप से परेशान हैं, और यदि वेतन नहीं मिला तो उनके पास आत्महत्या के सिवाय कोई
विकल्प नहीं बचेगा। बुधवार की रात करीब आठ बजे शौकिंद्र ने कमरे में रखी दवाओं की ओवरडोज ले ली। लोगों ने उन्हें चिकित्सक के पास उपचार के बाद घर भेज दिया गया। गुरुवार की सुबह फिर स्थिति गंभीर देख उन्हें सीएचसी इटवा और मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। बड़ी संख्या में शिक्षक अस्पताल पहुंचे। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है। शिक्षक दो माह से वेतन के लिए दर-दर भटक रहा है। इससे वह मानसिक रूप से टूट गया। इस पर बीईओ पर मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला महामंत्री पंकज त्रिपाठी व ब्लाक अध्यक्ष मो. इमरान ने कहा कि यह प्रशासनिक असंवेदनशीलता का उदाहरण है। डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसमें एडीएम, मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्साधीक्षक व बीएसए को शामिल किया गया है। डीएम ने शुक्रवार की शाम तक जांच रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। राजेश कुमार, बीईओ ने बताया कि कार्य पूरा न होने के कारण वेतन रोका गया था। प्रताड़ना के आरोप निराधार